लाल जिन्न नील परी साधना: रातों-रात धनवान बनाने वाली
सबसे खतरनाक और तीव्र साधना!
अध्यात्म, रहस्यवाद और साधना जगत में विभिन्न शक्तियों, परियों और जिन्नात की साधनाओं का एक अलग स्थान माना जाता है। प्रयोक्ताओं और साधकों के बीच धन-दौलत प्राप्त करने और अटके हुए कार्यों को तीव्र गति से पूरा करने के लिए विभिन्न साधनाओं की चर्चा की जाती है। इसी क्रम में जीन, लाल परी और नील परी की साधना को अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावकारी माना गया है। यह साधना धन-दौलत लाकर देने और सभी कार्यों को चुटकी में पूरा करने का दावा करती है। जय महाकाल मित्रो आज का विषय जिन्न परी के बारे में जानेंगे !
१. साधना का परिचय और विशेषताएँ
साधना के जानकारों के अनुसार, यह साधना मुख्य रूप से दो प्रमुख उद्देश्यों के लिए जानी जाती है:
धन-दौलत की प्राप्ति: यह शक्ति साधक के लिए प्रचुर मात्रा में धन और भौतिक सुख-सुविधाएँ जुटाने में सक्षम बताई जाती है।
त्वरित कार्य सिद्धि: इस साधना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सभी प्रकार के कार्यों को चुटकी में यानी बेहद कम समय में पूरा करने का सामर्थ्य रखती है।
२. साधना के लिए आवश्यक पूर्व-तैयारियाँ और नियम
किसी भी तांत्रिक या रहस्यमयी साधना को शुरू करने से पहले कुछ कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, ताकि साधना के दौरान किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा या बाधा का सामना न करना पड़े:
गुरु अनुमति: किसी भी प्रकार की गुप्त या उच्च साधना को बिना गुरु की अनुमति के शुरू करना वर्जित माना गया है। बिना गुरु के मार्गदर्शन के ऐसे मार्ग पर चलना हानिकारक हो सकता है।
पाक-पवित्रता: साधक का तन और मन दोनों से पूरी तरह पाक-पवित्र होना आवश्यक है। साधना काल में शुद्धता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
सही समय और दिन: इस साधना को करने के लिए शनिवार या मंगलवार के दिन का चयन किया जाता है।
समय: साधना का सही समय रात्रि के १२ बजे के बाद का होता है, जब चारों तरफ एकांत और शांति हो।
स्थान: साधना हमेशा एक एकांत कमरे में की जानी चाहिए, जहाँ किसी बाहरी व्यक्ति का हस्तक्षेप या आवाजाही न हो।
३. पूजन सामग्री और वातावरण
साधना कक्ष का वातावरण ऊर्जावान और अनुकूल बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्रियों की आवश्यकता होती है:
मोमबत्ती और अगरबत्ती: कमरे में उचित प्रकाश और सुगंध के लिए मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाई जाती है।
धूप और लोबान: वातावरण को पवित्र और शक्ति-अनुकूल बनाने के लिए धूप और लोबान जलाया जाता है।
माला: मंत्र जाप के लिए हकीक की माला का प्रयोग किया जाता है, जिससे ऊर्जा का नियंत्रण सही ढंग से हो सके।
४. साधना की विधि और नियमबद्ध प्रक्रिया
जब उपर्युक्त सभी तैयारियाँ पूरी हो जाती हैं, तब मुख्य साधना विधि शुरू होती है:
अवधि: इस साधना की कुल अवधि २१ दिनों की होती है।
मंत्र जाप की संख्या: साधक को प्रतिदिन रात्रि में एकांत कमरे में बैठकर हकीक माला से इस मंत्र का ३५१ बार जाप करना होता है। यह क्रम लगातार २१ दिनों तक बिना किसी नागा के निभाना पड़ता है।
५. मूल मंत्र और सुरक्षात्मक निर्देश साधना का मुख्य मंत्र इस प्रकार है:-
जिन्न नील परी मंत्र:-
"बिस्मिल्लाह रहमान रहीम या सिन सीन बासिन या परी लाल (...........................) नील ता जीन हाजिर हो, हाजिर हो ,हाजिर हो, दुहाई अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई अल्लाह बादशाह की!"
महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक नोट: यह मंत्र केवल साधकों की जानकारी और अध्ययन हेतु प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार के उन्माद और तीव्र प्रभाव वाले मंत्रों का प्रयोग बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के करना बेहद खतरनाक और हानिकारक साबित हो सकता है। यही कारण है कि सुरक्षा की दृष्टि से मंत्र के कुछ संवेदनशील अंश सुरक्षित (गोपनीय) रखे गए हैं, ताकि कोई भी इसका अनधिकृत या गलत प्रयोग न कर सके।
जीन और परियों से जुड़ी साधनाएँ अत्यधिक संवेदनशील और जटिल होती हैं। इन्हें केवल उच्च कोटि के अनुभवी साधक ही कड़े नियमों के तहत समझ सकते हैं। साधारण व्यक्तियों के लिए इस तरह के जोखिम भरे मार्ग पर चलना मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है। अतः किसी भी साधना को आजमाने से पहले उसकेीय प्रभावों और गुरु के वचनों का पूर्ण सम्मान करना चाहिए।
गुरूजी - 91 9207283275
