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माँ कामाख्या की शक्तिशाली साधना: अंबुबाची के पावन दिनों में कैसे करें मंत्र जप

 

माँ कामाख्या की शक्तिशाली साधना:अंबुबाची के पावन 

दिनों में कैसे करें मंत्र जप

भारत की प्राचीन शक्ति उपासना परंपरा में माँ कामाख्या का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। असम के नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या धाम ५१ शक्तिपीठों में प्रमुख शक्तिपीठ है। हर वर्ष अंबुबाची पर्व के दौरान यहाँ लाखों श्रद्धालु, साधक और तांत्रिक माँ के दर्शन एवं साधना के लिए पहुँचते हैं। यह पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि शक्ति, सृजन और प्रकृति के दिव्य रहस्य का प्रतीक माना जाता है।   जय महाकाल आदेश दोस्तों


सनातन मान्यताओं के अनुसार अंबुबाची पर्व के दौरान माँ कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसी कारण मंदिर के गर्भगृह के कपाट कुछ दिनों के लिए बंद रहते हैं और विशेष साधनाएँ की जाती हैं। तंत्र साधना में इस समय को अत्यंत प्रभावशाली और सिद्धिदायक माना गया है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इस अवधि में माँ का स्मरण करते हैं, उन पर देवी की विशेष कृपा होने की मान्यता है।

माँ कामाख्या का महत्व:

माँ कामाख्या को आदिशक्ति, महामाया और समस्त सृष्टि की जननी कहा गया है। देवी का यह स्वरूप केवल भौतिक इच्छाओं की पूर्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि साधक को आध्यात्मिक उन्नति, आत्मबल और आंतरिक शक्ति भी प्रदान करता है। कामाख्या धाम की सबसे विशेष बात यह है कि यहाँ देवी की किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि प्राकृतिक योनिरूप शक्ति की उपासना की जाती है, जो सृष्टि के मूल स्रोत का प्रतीक है।

इसी कारण कामाख्या धाम को तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है और अंबुबाची पर्व को शक्ति साधना के लिए विशेष महत्व प्राप्त है।

अंबुबाची पर्व क्या है?

अंबुबाची पर्व वर्षा ऋतु के आगमन के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि इस समय पृथ्वी माता और देवी शक्ति सृजन की विशेष अवस्था में होती हैं। तीन दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और चौथे दिन विशेष पूजा के बाद पुनः दर्शन प्रारंभ होते हैं। इस अवसर पर मिलने वाला अंगवस्त्र और प्रसाद अत्यंत शुभ माना जाता है।

अंबुबाची पर्व हमें प्रकृति, मातृत्व और सृजन शक्ति के सम्मान का संदेश देता है। यही कारण है कि इस पर्व को शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

अंबुबाची पर्व में मंत्र साधना का महत्व:

शास्त्रों के अनुसार जब देवी शक्ति का प्रभाव विशेष रूप से सक्रिय होता है, तब किया गया मंत्र जप अधिक फलदायी माना जाता है। अंबुबाची पर्व का समय भी ऐसा ही माना जाता है। इन दिनों किए गए मंत्र जप से मन की अशांति दूर होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और साधक के भीतर आध्यात्मिक जागरण की भावना विकसित होती है।

जो भक्त नियमित रूप से माँ कामाख्या के मंत्रों का जप करते हैं, उन्हें मानसिक शांति और देवी कृपा की अनुभूति होने लगती है।

माँ कामाख्या का शक्तिशाली मंत्र:

माँ कामाख्या की उपासना के लिए यह मंत्र अत्यंत लोकप्रिय माना जाता है—

॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कामाख्यायै नमः ॥

यह मंत्र ज्ञान, शक्ति और देवी कृपा का प्रतीक माना जाता है। अंबुबाची पर्व के दौरान इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करना शुभ माना जाता है।

इसके अतिरिक्त एक सरल बीज मंत्र भी जपा जा सकता है—

॥ ह्रीं कामाख्यायै नमः ॥

जो साधक लंबी साधना नहीं कर सकते, वे प्रतिदिन १०८ बार इस मंत्र का जप कर सकते हैं।

माँ कामाख्या साधना की सरल विधि:

अंबुबाची पर्व के दौरान घर पर भी श्रद्धा के साथ साधना की जा सकती है। प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर माँ कामाख्या का चित्र या यंत्र स्थापित करें। घी का दीपक और धूप जलाएँ। देवी को लाल पुष्प अर्पित करें और मन ही मन उनका ध्यान करें।

इसके बाद संकल्प लें कि यह जप आत्मकल्याण, मानसिक शांति और देवी कृपा प्राप्ति के लिए कर रहे हैं। फिर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से कम से कम एक माला मंत्र जप करें। जप पूर्ण होने के बाद माँ से अपनी भूलों के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद अर्पित करें।

यदि संभव हो तो अंबुबाची पर्व के तीनों दिनों में नियमित जप करें। इससे साधना में स्थिरता और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

साधना के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें:

मंत्र साधना करते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। झूठ, अपशब्द और किसी का अनादर करने से बचना चाहिए। साधना का मुख्य आधार श्रद्धा, विश्वास और मन की पवित्रता है।

अंबुबाची पर्व के दौरान माँ का स्मरण जितनी निष्ठा से किया जाता है, साधना उतनी ही प्रभावशाली मानी जाती है।

माँ कामाख्या को प्रिय भोग:

माँ कामाख्या को लाल पुष्प विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त नारियल, खीर, गुड़, अनार और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। भोग अर्पित करते समय माँ से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करनी चाहिए।

साधना से प्राप्त होने वाले लाभ:

नियमित मंत्र जप और साधना से मन को शांति मिलती है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है। साधक के भीतर भक्ति और समर्पण की भावना विकसित होती है। कई भक्तों का मानना है कि माँ कामाख्या की कृपा से जीवन की बाधाएँ कम होती हैं और आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त होता है।

हालाँकि साधना का उद्देश्य केवल सांसारिक लाभ प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। सच्ची साधना वह है जो व्यक्ति को अपने भीतर की शक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण का अनुभव कराए।

अंबुबाची पर्व माँ कामाख्या की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। यह पर्व हमें प्रकृति, मातृत्व और सृजन शक्ति के सम्मान का संदेश देता है। यदि आप श्रद्धा, विश्वास और पवित्र मन से माँ कामाख्या के मंत्रों का जप करते हैं, तो यह साधना आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। 

ये मां का विग्रह अति शक्तिशाली तंत्र ऊर्जा का स्रोत है, विशेष दिन तिथि नक्षत्र में, नव निर्वाचित साधकों को विशेष क्रिया के अधीन विशेष मंत्र की दीक्षा दी जाती है,जिससे साधक के जीवन में आशातीत परिवर्तन होके साधक जनकल्याण के पात्र बने !

इस अंबुबाची पर्व पर माँ कामाख्या का स्मरण करें, उनके मंत्रों का जप करें और आदिशक्ति की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें। माँ की कृपा से जीवन में शांति, शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो।

जय माँ कामाख्या। जय महाकाल!! आदेश ||


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गुरूजी- 91 9207283275









कामाख्या देवी मंत्र कवच

-जय महाकाल -


कामाख्या देवी मंत्र कवच साधना-

-kamakhya devi mantra Sadhna -






- ​: कामाख्या कवच :- 

​कामाख्यायै वरदे देवि नील पर्वत वासिनी ।

त्वं देवी जगत माता योनि मुद्रे नमस्तुते ।।

​नारद उवाचकवच कीदृशं देव्या महाभयनिवर्तकम् ।

कामाख्यायास्तु तद्ब्रूहि साम्प्रतं मे महेश्वर ।।

​महादेव उवाच

शृणुष्व परमं गुह्यं महाभयनिवर्तकम् ।

कामाख्यायाः सुरश्रेष्ठ कवचं सर्व मङ्गलम् ।।

यस्य स्मरणमात्रेण योगिनी डाकिनीगणाः ।

राक्षस्यो विघ्नकारिण्यो याश्चान्या विघ्नकारिकाः ।।

क्षुत्पिपासा तथा निद्रा तथान्ये ये च विघ्नदाः ।

दूरादपि पलायन्ते कवचस्य प्रसादतः ।।

निर्भयो जायते मर्त्यस्तेजस्वी भैरवोपमः ।

समासक्तमनाश्चापि जपहौमादिकर्मसु ।

भवेच्च मन्त्रतन्त्राणां निर्विघ्नेन सुसिद्धये ।।

​मां कामाख्या देवी कवच

ओं प्राच्यां रक्षतु मे तारा कामरूपनिवासिनी ।

आग्नेय्यां षोडशी पातु याम्यां धूमावती स्वयम् ।।

. कामाख्या कवच - भाग 

​नैर्ऋत्यां भैरवी पातु वारुण्यां भुवनेश्वरी ।

वायव्यां सततं पातु छिन्नमस्ता महेश्वरी ।।

​कौबेर्यां पातु मे देवी श्रीविद्या बगलामुखी ।

ऐशान्यां पातु मे नित्यं महात्रिपुरसुन्दरी ।।

​ऊर्ध्वरक्षतु मे विद्या मातंगी पीठवासिनी ।

सर्वतः पातु मे नित्यं कामाख्या कलिकास्वयम् ।।

​ब्रह्मरूपा महाविद्या सर्वविद्यामयी स्वयं ।

शीर्षे रक्षतु मे दुर्गा भालं श्री भवगेहिनी ।।

​त्रिपुरा भ्रूयुगे पातु शर्वाणी पातु नासिकाम ।

चक्षुषी चण्डिका पातु श्रोत्रे नीलसरस्वती ।।

​मुखं सौम्यमुखी पातु ग्रीवां रक्षतु पार्वती ।

जिह्वां रक्षतु मे देवी जिह्वाललनभीषणा ।।

​वाग्देवी वदनं पातु वक्षः पातु महेश्वरी ।

बाहू महाभुजा पातु कराङ्गुलीः सुरेश्वरी ।।

. कामाख्या कवच - भाग 

​पृष्ठतः पातु भीमास्या कट्यां देवी दिगम्बरी ।

उदरं पातु मे नित्यं महाविद्या महोदरी ।।

​उग्रतारा महादेवी जङ्घोरू परिरक्षतु ।

गुदं मुष्कं च मेढ्रं च नाभिं च सुरसुन्दरी ।।

​पादाङ्गुलीः सदा पातु भवानी त्रिदशेश्वरी ।

रक्तमासास्थिमज्जादीन्पातु देवी शवासना ।।

​महाभयेषु घोरेषु महाभयनिवारिणी ।

पातु देवी महामाया कामाख्यापीठवासिनी ।।

​भस्माचलगता दिव्यसिंहासनकृताश्रया ।

पातु श्री कालिकादेवी सर्वोत्पातेषु सर्वदा ।।

​रक्षाहीनं तु यत्स्थानं कवचेनापि वर्जितम् ।

तत्सर्वं सर्वदा पातु सर्वरक्षण कारिणी ।।

​इदं तु परमं गुह्यं कवचं मुनिसत्तम ।

कामाख्या भयोक्तं ते सर्वरक्षाकरं परम् ।।

​. कामाख्या कवच - फलश्रुति 

​अनेन कृत्वा रक्षां तु निर्भयः साधको भवेत् ।

न तं स्पृशेदभयं घोरं मन्त्रसिद्धि विरोधकम् ।।

​जायते च मनः सिद्धिर्निर्विघ्नेन महामते ।

इदं यो धारयेत्कण्ठे बाहौ वा कवचं महत् ।।

​अव्याहताज्ञः स भवेत्सर्वविद्याविशारदः ।

सर्वत्र लभते सौख्यं मङ्गलं तु दिनेदिने ।।

​यः पठेत्प्रयतो भूत्वा कवचं चेदमद्भुतम् ।

स देव्याः पदवीं याति सत्यं सत्यं न संशयः ।।

श्री गुरुवे नमः

॥ श्री कामाख्या कवच पाठ विधि ॥


मित्रों, श्री कामाख्या कवच का पाठ देवी की कृपा, साधना की रक्षा, मनोकामना सिद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है। विशेष रूप से अंबुबाची, नवरात्रि, अष्टमी, चतुर्दशी, पूर्णिमा एवं शुक्रवार के दिन इसका पाठ अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

पाठ करने से पूर्व प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को शुद्ध कर माँ कामाख्या का चित्र, यंत्र अथवा विग्रह स्थापित करें। इसके पश्चात दीपक, धूप, पुष्प एवं नैवेद्य अर्पित कर श्रद्धापूर्वक देवी का ध्यान करें।
इसके बाद दोनों हाथों में जल, अक्षत एवं पुष्प लेकर अपनी मनोकामना अथवा साधना सिद्धि के लिए संकल्प लें। संकल्प में अपना नाम तथा पाठ का उद्देश्य मन ही मन स्मरण करें।

अब सर्वप्रथम श्री गणेश जी का स्मरण करें। तत्पश्चात गुरु, इष्टदेव एवं कुलदेवता का ध्यान करें। माँ कामाख्या के प्रणाम मंत्र का जप करें और उसके बाद कामाख्या मूल मंत्र का 11, 21 अथवा 108 बार जप करें। मंत्र जप पूर्ण होने पर श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री कामाख्या कवच का पाठ करें।
सामान्य साधक प्रतिदिन एक बार कवच पाठ कर सकते हैं। विशेष अनुष्ठान के लिए 11, 21 अथवा 40 दिनों तक नियमित पाठ करना उत्तम माना गया है। अंबुबाची महापर्व के दौरान प्रतिदिन 3, 5 अथवा 11 बार कवच पाठ करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पाठ के समय शुद्धता, संयम एवं सात्त्विकता का विशेष ध्यान रखें। क्रोध, असत्य भाषण, निंदा तथा तामसिक आचरण से यथासंभव दूर रहें। पाठ के मध्य अनावश्यक वार्तालाप न करें तथा पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ माँ का स्मरण करते रहें।

कवच पाठ पूर्ण होने पर माँ कामाख्या से अपनी रक्षा, कृपा, शांति एवं साधना सिद्धि की प्रार्थना करें तथा अंत में देवी को प्रणाम कर क्षमा याचना करें।
प्रार्थना :
"हे माँ कामाख्या! मेरी समस्त बाधाओं का नाश करें, मुझे अपनी कृपा, रक्षा एवं आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करें। मेरे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि तथा साधना सिद्धि का वास हो।"

कोई भी सिद्धि साधना में प्रगति उन्नति करना चाहते , हो तो गुरु सानिध्य गुरु निर्देश अवश्य प्राप्त करने से 
साधना सिद्धि में शीघ्र सफलता प्राप्त होती हैं, ये त्रिकाल सत्य हैं 

॥ जय माँ कामाख्या ॥
॥ हर हर महादेव ॥
॥ जय गुरु गोरक्षनाथ ॥
 

जय महाकाल जय अलख आदेश


गुरूजी  - +91 9207 283 275