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सर्व बाधा मुक्ति शाबर मंत्र


जय महाकाल -


सर्व बाधा मुक्ति शाबर मंत्र -


  ये मंत्र योगी  गुरु गोरखनाथ प्रणित हैं  का शाबर मंत्र 







मंत्र -

ॐ वज्र में कोठा, वज्र में ताला, वज्र में बंध्या दस्ते द्वारा, तहां वज्र का लग्या किवाड़ा, वज्र में चौखट, वज्र में कील, जहां से आय, तहां ही जावे, जाने भेजा, जांकू खाए, हमको फेर न सूरत दिखाए, हाथ कूँ, नाक कूँ, सिर कूँ, पीठ कूँ, कमर कूँ, छाती कूँ जो जोखो पहुंचाए, तो गुरु गोरखनाथ की आज्ञा फुरे, मेरी भक्ति गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र इश्वरोवाचा. 




विधि - किसी भी महीने के पूर्णिमा के दिन ७ अलग अलग   कुओ या किसी अलग  नदी से जल लाकर इस मंत्र का  १०८ बार  उच्चारण करते हुए  उस रोगी को स्नान करवाए तो..  उसके ऊपर से सभी प्रकार का किया-कराया ,ऊपरी परायी।  किया कराई , टोना ,इत्यादि का शमन हो जाता हैं। .. इस क्रिया को ११ दिन तक करनी हैं। .. गोरक्षनाथजी के कृपा से हर बाधा शनैः शनैः  समाप्त हो जाती हैं। .. 

जय महाकाल || आदेश || 


संपर्क -  +91 9207 283 275






साबर- देवी शक्ति-पाठ श्रीमहा-लक्ष्मी कमला

|| जय महाकाल  आदेश || 


साबर-शक्ति-पाठ

पूर्व-पीठिका..
।। विनियोग ।।
श्रीसाबर-शक्ति-पाठ का, भुजंग-प्रयात है छन्द ।
भारद्वाज शक्ति ऋषि, श्रीमहा-काली काल प्रचण्ड ।।
ॐ क्रीं काली शरण-बीज, है वायु-तत्त्व प्रधान ।
कालि प्रत्यक्ष भोग-मोक्षदा, निश-दिन धरे जो ध्यान ।।
।। ध्यान ।।
मेघ-वर्ण शशि मुकुट में, त्रिनयन पीताम्बर-धारी ।
मुक्त-केशी मद-उन्मत्त सितांगी, शत-दल-कमल-विहारी ।।
गंगाधर ले सर्प हाथ में, सिद्धि हेतु श्री-सन्मुख नाचै ।
निरख ताण्डव छवि हँसत, कालिका ‘वरं ब्रूहि’ उवाचै ।।
।। पाठ-प्रार्थना ।।
जय जय श्रीशिवानन्दनाथ ! भगवम्त भक्त-दुःख-हारी ।
करो स्वीकार साबर-शक्ति-पाठ, हे महा-काल-अवतारी ।



श्रीमहा-लक्ष्मी कमला 

ॐ विष्णु-प्रिया दिग्दलस्था नमो, विश्वाधार-जननि कमलायै नमो ।
बीजाक्षरों की तुम्हीं सृष्टि करती, चरण-शरण भक्त के क्लेश हरती ।।
सिन्धु-कन्या माया-बीज-काया, मोह-पाश से जग को भ्रमाया ।
योगी भी हुए नहैं हैरान तुमसे, कराओ अन्तर्बहिर्याग नित्य मुझसे ।।
न करता हूँ जाप-पूजा मैं तेरी, इतना ही जानता हूँ माँ तू मेरी ।
पद्म-चक्र-शंख-मधु-पात्र धारे, विकट वीर योद्धा तूने सँहारे ।।
श्रीअपराजिता वैष्णवी नाम तेरा, माँ एकाक्षरी तू आधार मेरा ।
तू ही गुरु-गोविन्द करुणा-मयी, जै जै श्रीशिवानन्दनाथ-लीला-मयी ।।
ऐरावत है शुण्डाभिषेक करते, दे प्रत्यक्ष दरशन हे विश्व-भर्ते ।
योग-भोगदा रमा विष्णु-रुपा, मेरी कामधेनु काम-स्वरुपा ।।
सिद्धैशवर्य-दात्री हे शेष-शायी, करे दास बिनती करो माँ सहाई ।
पद्मा चञ्चला श्रीलक्ष्मी कहाई, पीताम्बरा तू गरुड़-वाहना सुहाई ।।
त्रिलोक-मोहन-करी कामिनी, जयति जय श्रीहरि-भामिनी ।
रुक्मिणी राज्ञी अर्थ-क्लेश-त्राता, जय श्रीधन-दात्री विश्व-माता ।।
महा-लक्ष्मी लक्ष्मणा श्यामलांगी, पद्म-गन्धा श्री श्रीकोमलांगी ।
कालिन्दी कमले कर्म-दोष-हन्त्री, सुदर्शनीया ग्रीवा में माला वैजन्ती ।।


श्रीमहा-लक्ष्मी कमला समर्पणम् ।।


विधि :।।श्रीसाबर-शक्ति-पाठं सम्पूर्णं, शुभं भुयात्।।
उक्त श्री ‘साबर-शक्ति-पाठ‘ के रचियता ‘ योगिराज’ श्री शक्तिदत्त शिवेन्द्राचार्य नामक कोई महात्मा रहे है। उनके उक्त पाठ की प्रत्येक पंक्ति रहस्य-मयी है। पूर्ण श्रद्धा-सहित पाठ करने वाले को सफलता निश्चित रुप से मिलती है, ऐसी मान्यता है।
किसी कामना से इस पाठ का प्रयोग करने से पहले तीन रात्रियों में लगातार इस पाठ की १११ आवृत्तियाँ ‘अखण्ड-दीप-ज्योति’ के समक्ष बैठकर कर लेनी चाहिए। तदनन्तर निम्न प्रयोग-विधि के अनुसार निर्दिष्ट संख्या में निर्दिष्ट काल में अभीष्ट कामना की सिद्धि मिल सकेगी।



गुरूजी - +91 9207283275 

सोमवती अमावस्या की शाबर मन्त्र साधना


|| जय महाकाल आदेश || 


सोमवती अमावस्या की  शाबर मन्त्र  साधना 




साबर सोमवती साधना 


जब बात पूर्णता की हो रही हो तो उसका अर्थ जीवन के दोनों पक्षों से होता है. अध्यात्मिक क्षेत्र में जहा हम विविध साधनाओ का अभ्यास करते हुए गुरु चरणों में लिन हो जाए उस तरह जीवन में यह भी जरूरू है की भौतिक पक्ष भी मजबूत हो. हमें मान सन्मान यश कीर्ति ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सके. भौतिक जीवन में सफलता के बिना आध्यात्मिक पक्ष में सम्पूर्णता को प्राप्त करने के लिए प्रयत्नशील होने पर अत्यधिक संघर्षो का सामना करना पड़ता है, वरन उत्तम तो ये है की हम गृहस्थ और आध्यात्म दोनों को साथ में लेके अपनी मंजिल की तरफ आगे बढे. साधनाओ के अंतर्गत सभी प्रकार की गृहस्थ समस्याओ के निराकरण के लिए उपाय है, इसका सीधा अर्थ यही बनता है की साधना मार्ग सिर्फ आध्यात्मिक उन्नति के लिए नहीं है लेकिन भौतिक पक्ष में भी पूर्ण सफलता प्राप्त करने के लिए साधनाओ का सहारा लिया जा सकता है. आज के इस युग में जहाँ एक तरफ द्रव्य का ही बोलबाला है, जीवन के लिए एक उत्तम आय का स्त्रोत होना अत्यधिक जरुरी हो चूका है. लेकिन कई बार यु होता है की व्यक्ति विशेष को अपनी काबिलियत होने पर भी अपने कार्य क्षेत्र में योग्य पद या काम नहीं मिल पता है. या फिर काम मिलने पर भी कई प्रकार की बाधाए अडचने आने लगती है. कई बार योग्य जगह काम मिलने पर भी वेतन की समस्या होती है. कई लोगो की, खास कर के वह विद्यार्थी जो की अपनी पहली नौकरी की तलाश में हो उन्हें भी यह चिंता बराबर बनी रहती है की उन्हें यथायोग्य काम मिले जो की भविष्य में उनकी प्रगति के लिए एक आधार स्तंभ बने.
साबर साधनाओ में एसी कई साधनाए प्राप्त होती है जो की इस प्रकार के उद्देश्य में पूर्णता प्राप्त करने के लिए साधको का मार्ग प्रसस्त करती है. आगे की पंक्ति में भी एक एसी ही अद्भुत साधना दी जा रही है. इस साधना को करने पर साधक को योग्य काम मिलने में जोभी अडचने हो दूर हो जाती है, योग्य मनोकुलित व् प्रगति वर्धक स्थान पर नौकरी मिलती है. अगर किसीको अपनी नौकरी में किसी प्रकार की समस्या भी हो तो भी यह साधना से वह दूर होती है. संस्क्षेप्त में कहा जाए तो यह साधना काम व् नौकरी की हर समस्याओ को दूर करने क लिए ही बनी है.

इस साधना को साधक सोमवार मंगलवार शुक्रवार या शनिवार से शुरू कर सकते है
समय रात्रि के १० बजे बाद का रहे, दिशा उत्तर रहे.
रात्रि में स्नान करने के बाद सफ़ेद वस्त्र को धारण करे. इसके बाद अपने पूजा स्थान में बैठ कर के गुरु पूजन सम्प्पन करे और सफलता प्राप्ति के लिए प्रार्थना करे.
उसके बाद निम्न मंत्र का १०८ बार उच्चारण करे
मंत्र : ओम सोमावती भगवती बरगत देहि उत्तीर्ण सर्व बाधा स्तम्भय रोशीणी इच्छा पूर्ति कुरु कुरु कुरु सर्व वश्यं कुरु कुरु कुरु हूं तोशिणी नमः
यह जाप सफ़ेद हकीक माला से हो और उस माला को मंत्र जाप के बाद धारण कर ले.
यह क्रम पुरे ११ दिन तक रहे. इस साधना में रात्रि में भोजन करने से पहले थोडा खाध्य पदार्थ गाय को खिलाना चाहिए. ऐसा करने के बाद ही भोजन करे. अगर यह संभव न हो तो रात्रि में भोजन न करे.
इस साधना पूरी होने पर माला को विसर्जित नहीं करना चाहिए तथा गले में धारण करे रखना चाहिए.
यह साधना का करिश्मा है की यह साधना करने पर कुछ ही दिनों में यथायोग्य परिणाम प्राप्त होने लगते है.



गुरु परामर्श - +91 9207283275