गुरु पूर्णिमा की रात करें यह एक गुप्त साधना,
गुरु कृपा और मनोकामना दोनों का मिलेगा आशीर्वाद
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में गुरु को केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला प्रकाश माना गया है। गुरु वह शक्ति है जो अज्ञान के अंधकार को दूर करके साधक को आत्मज्ञान, अनुशासन और सत्य के मार्ग पर चलना सिखाती है। इसी गुरु तत्व को समर्पित है गुरु पूर्णिमा, जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन गुरु पूजन, गुरु मंत्र जाप और साधना का विशेष महत्व माना गया है। जय महाकाल साधको
गुरु पूर्णिमा की रात साधना के लिए विशेष मानी जाती है। पूर्णिमा का चंद्रमा मन और भावनाओं से जुड़ा माना जाता है। इस रात वातावरण में शांति होती है और साधक यदि श्रद्धा, संयम और एकाग्रता के साथ अपने गुरु या इष्टदेव का ध्यान करे, तो उसका मन साधना में अधिक आसानी से लग सकता है।
यहां बताई जा रही साधना किसी प्रकार का तांत्रिक प्रदर्शन या चमत्कार का दावा नहीं है। इसका उद्देश्य मन को शांत करना, गुरु तत्व के प्रति श्रद्धा जागृत करना और अपने जीवन की सही दिशा के लिए प्रार्थना करना है।
गुरु पूर्णिमा की रात की सरल गुरु साधना :-
इस साधना के लिए गुरु पूर्णिमा की रात स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनें। अपने पूजा स्थान को साफ करें और वहां अपने गुरु, गुरु परंपरा या इष्टदेव का चित्र स्थापित करें।
यदि आपके जीवन में कोई वास्तविक गुरु हैं, जिनसे आपने मंत्र या आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त की है, तो सबसे पहले उन्हीं का स्मरण करें। यदि अभी तक किसी गुरु से दीक्षा नहीं मिली है, तो अपने माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी मार्गदर्शकों का स्मरण करें जिन्होंने जीवन में आपको कुछ अच्छा सिखाया है।
पूजा स्थान पर एक दीपक जलाएं। दीपक के सामने शांत होकर कुछ मिनट बैठें और अपने मन को स्थिर करने का प्रयास करें। इसके बाद गुरु के चरणों का ध्यान करते हुए मन में श्रद्धा से प्रार्थना करें।
गुरु मंत्र का जाप करें :-
यदि आपको किसी योग्य गुरु से मंत्र प्राप्त हुआ है, तो गुरु पूर्णिमा की रात उसी गुरु मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम माना जाता है। मंत्र का जाप अपनी क्षमता के अनुसार १०८ बार या अधिक कर सकते हैं।
जिन लोगों को अभी तक किसी गुरु से मंत्र दीक्षा प्राप्त नहीं हुई है, वे अपने इष्टदेव का स्मरण कर सकते हैं। गुरु तत्व के प्रति श्रद्धा रखते हुए निम्न मंत्र का जाप भी किया जा सकता है—
॥ ॐ गुरवे नमः ॥
इस मंत्र का जाप करते समय मन को शांत रखें। मंत्र जाप को केवल किसी इच्छा की पूर्ति का साधन न बनाएं। गुरु साधना का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर ज्ञान, विवेक, संयम और सही मार्ग पर चलने की शक्ति प्राप्त करना है।
अपनी मनोकामना गुरु चरणों में रखें
मंत्र जाप के बाद कुछ समय शांत बैठें। अपनी मनोकामना को मन में रखें और गुरु के सामने अपनी बात सरल शब्दों में कहें। अपनी इच्छा को लेकर अत्यधिक चिंता या बेचैनी न रखें।
गुरु तत्व के सामने प्रार्थना करते समय मन में यह भाव रखें
“हे गुरुदेव, यदि मेरी इच्छा मेरे जीवन और कर्म के लिए उचित है तो मुझे उसे प्राप्त करने का मार्ग दिखाइए। यदि मेरी इच्छा उचित नहीं है तो मुझे उसे समझने का विवेक दीजिए।”
यह प्रार्थना साधक के भीतर अहंकार और जिद को कम करती है। कई बार मनुष्य किसी एक इच्छा को ही अपने जीवन का अंतिम लक्ष्य मान लेता है, जबकि उसके लिए कोई दूसरा मार्ग अधिक उचित हो सकता है।
गुरु पूर्णिमा पर करें यह विशेष संकल्प
गुरु पूर्णिमा की रात साधना के बाद एक छोटा-सा संकल्प लेना भी बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा संकल्प लें जिसे आप वास्तव में अपने जीवन में निभा सकें।
आप यह संकल्प ले सकते हैं -
मैं अपने गुरु और माता-पिता का सम्मान करूंगा।
मैं गलत मार्ग से बचने का प्रयास करूंगा।
मैं अपनी बुरी आदतों को धीरे-धीरे छोड़ने का प्रयास करूंगा।
मैं किसी भी साधना को दिखावे के लिए नहीं करूंगा।
मैं गुरु द्वारा दी गई अच्छी शिक्षा को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करूंगा।
गुरु की सच्ची कृपा केवल पूजा करने से नहीं, बल्कि जीवन में परिवर्तन लाने से प्राप्त होती है। यदि व्यक्ति रोज झूठ, अहंकार, क्रोध और गलत कार्यों में लगा रहे और केवल एक दिन गुरु पूजन करे, तो साधना का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं होता।
गुरु कृपा पाने का सबसे बड़ा रहस्य :-
बहुत से लोग गुरु कृपा पाने के लिए कठिन साधनाएं और विशेष उपाय खोजते हैं। लेकिन गुरु परंपरा में सबसे बड़ा उपाय श्रद्धा, सेवा और अनुशासन माना गया है।
गुरु की सेवा का अर्थ केवल उनके चरण दबाना या उनके सामने उपस्थित रहना नहीं है। गुरु की सच्ची सेवा उनके द्वारा दिए गए ज्ञान का सम्मान करना है। यदि गुरु ने सत्य बोलने को कहा है तो सत्य बोलना, यदि संयम रखने को कहा है तो संयम रखना और यदि किसी गलत कार्य से दूर रहने को कहा है तो उस शिक्षा का पालन करना ही वास्तविक गुरु सेवा है।
गुरु पूर्णिमा की रात साधक को अपने जीवन पर भी विचार करना चाहिए। पिछले वर्ष में उसने कौन-कौन सी गलतियां कीं? किन आदतों ने उसे कमजोर बनाया? किन लोगों ने उसे सही दिशा दी? इन प्रश्नों पर मनन करना भी एक प्रकार की आंतरिक साधना है।
जरूरतमंद की सहायता करें
गुरु पूर्णिमा के दिन अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद की सहायता करना भी शुभ माना जाता है। किसी विद्यार्थी को पुस्तक देना, किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना या किसी जरूरतमंद की सहायता करना गुरु तत्व के प्रति सम्मान का सुंदर माध्यम है।
यदि संभव हो तो इस दिन किसी शिक्षक, गुरु या अपने माता-पिता का आशीर्वाद अवश्य लें। कई बार हम दूर बैठे किसी विशेष व्यक्ति को गुरु मानते हैं, लेकिन अपने जीवन में सबसे पहले ज्ञान देने वाले माता-पिता और शिक्षकों को भूल जाते हैं।
साधना में सावधानी रखें:–
गुरु पूर्णिमा की रात किसी भी प्रकार की अज्ञात या जोखिमपूर्ण साधना बिना योग्य गुरु के मार्गदर्शन के नहीं करनी चाहिए। इंटरनेट पर मिलने वाली हर साधना या हर मंत्र को आंख बंद करके करने से बचें।
सच्ची आध्यात्मिक साधना में जल्दबाजी नहीं होती। गुरु कृपा का अर्थ यह नहीं कि जीवन की हर समस्या अचानक समाप्त हो जाएगी। कई बार गुरु कृपा हमें समस्या से बचाने के बजाय समस्या का सामना करने की शक्ति देती है।
गुरु पूर्णिमा की इस पावन रात दीपक जलाकर, गुरु का स्मरण करके और सच्चे मन से प्रार्थना करें। अपनी मनोकामना गुरु चरणों में रखें, लेकिन साथ ही अपने कर्म और प्रयास को भी जारी रखें।
क्योंकि गुरु केवल इच्छा पूरी करने वाला नहीं होता—गुरु वह होता है जो हमें अपनी इच्छा, अपने कर्म और अपने जीवन को सही दिशा में समझना सिखाता है।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सभी गुरुजनों, माता-पिता और जीवन में सही मार्ग दिखाने वाले सभी मार्गदर्शकों को कोटि-कोटि प्रणाम।
!!अलख आदेश आदेश !! !! जय महाकाल!!
॥ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
गुरूजी - +91 9207283275






