|जय महाकाल |
होलिका पूर्णिमा पर शत्रु शांति हेतु शक्तिशाली तांत्रिक प्रयोग | Holika Purnima Tantra Prayog
जय महाकाल साधक मित्रों|होलिका पूर्णिमा की पावन रात्रि को तांत्रिक परंपरा में विशेष सिद्धि-काल माना गया है। यह वह समय है जब अग्नि तत्व सक्रिय होता है और साधना के द्वारा सूक्ष्म अवरोधों को शांति में परिवर्तित करने का प्रयास किया जाता है। आज मैं एक ऐसे प्रयोग की चर्चा कर रहा हूँ, जिसका उद्देश्य किसी को हानि पहुँचाना नहीं, बल्कि अपने जीवन में उत्पात मचाने वाले शत्रु-वृत्ति और विरोधात्मक ऊर्जा को शांत करना है।
सबसे पहले यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि “शत्रु संहार” का वास्तविक तात्पर्य व्यक्ति का नाश नहीं, बल्कि शत्रुता का अंत है। साधक का मार्ग सदैव धर्म और मर्यादा से बंधा होता है। यदि कोई व्यक्ति निरंतर आपके जीवन शैली को ठेस पहुँचा रहा हो, आपके कार्यों में बाधाएँ उत्पन्न कर रहा हो या मानसिक अशांति का कारण बन रहा हो, तभी इस प्रकार के प्रयोग को अंतिम उपाय के रूप में अपनाया जाना चाहिए। तंत्र शक्ति का उपयोग छोटे मोटे कारणों से नहीं किया जाता।
–आवश्यक सामग्री–
इस प्रयोग के लिए अत्यधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती। मुख्यतः तीन वस्तुएँ अपेक्षित हैं—
शमशान के मुर्दे का कफ़न का टुकड़ा 12× 12 इंच का हो
पुराने लोहे की कील या शमशान के बांस की तीली बना ले
काली स्याही (बाज़ार से अथवा काजल एवं सरसों के तेल से बनी हो )
इसके अतिरिक्त सामान्य पूजन सामग्री जैसे अक्षत, दीपक, मोली या काला धागा आदि।
🪬साधना की तैयारी🪬
साधना एकांत, स्वच्छ और शांत स्थान में की जानी चाहिए। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके आसन ग्रहण करें। सामने चौकी पर लाल अथवा काला वस्त्र बिछाएँ। उस पर अक्षत स्थापित करें तथा सरसों के तेल का दीप प्रज्वलित करें।
क्रिया शुरू करने से पहले अपना शरीर रक्षा घेरा बना ले ये प्रयोग अति उग्र हैं गुरु की देख रख में करे। तत्पश्चात संकल्प लें। यदि विरोध अनेक व्यक्तियों से हो तो “सकल शत्रु” का संकल्प लें, और यदि किसी एक विशेष व्यक्ति से हो तो उसका नाम स्पष्ट रूप से उच्चारित करें।
इसके बाद संक्षिप्त प्राथमिक पूजन क्रम इस प्रकार करें—
श्री गणेश, गुरु तथा भैरव का ध्यान एवं आवाहन करें। पूजन संक्षिप्त किंतु श्रद्धापूर्ण होना चाहिए।
–मंत्र लेखन विधान है–
कफ़न के टुकड़े को अपने सामने स्थापित करें। उसके चारों कोनों में काली स्याही से लोहे की कील से निम्न मंत्र लिखें
💀मंत्र - “ॐ टं टं टं सकल शत्रु संहारणाय फट् स्वाहा”💀
कफ़न के मध्य भाग में उस व्यक्ति का नाम अंकित करें, जिसकी शत्रुता से आप मुक्ति चाहते हैं। लेखन के समय मन एकाग्र एवं शांत रहे।
–जप प्रक्रिया- * गुरु एवं गणेश मंत्र जपे*
तत्पश्चात 3 माला उपर्युक्त शत्रु-शांति मंत्र का
जप पूर्ण श्रद्धा, संयम और स्पष्ट उच्चारण के साथ करें।
संकल्पबद्ध समापन करे
जप पूर्ण होने के पश्चात कफ़न के टुकड़े को आठ बार मोड़ें। प्रत्येक मोड़ के साथ मन में यह भावना दृढ़ करें—
“मेरे जीवन से शत्रुता का अंत हो, समस्त बाधाएँ शांत हों, और धर्ममय मार्ग प्रशस्त हो।”
अब उसे मोली अथवा काले धागे से बांध दें।
*विसर्जन प्रक्रिया*
इसके पश्चात दो विकल्पों में से किसी एक का चयन करें—
किसी सूखे एवं अनुपयोगी कुएँ में विसर्जन करें। या नदी के किसी सुनसान तट पे इसे गड्ढा खोद के दबा दे
अथवा दक्षिण दिशा में स्थित पीपल वृक्ष के समीप भूमि में दबाकर ऊपर पत्थर स्थापित करें।
विसर्जन के बाद पीछे मुड़कर न देखें। शांत मन से सीधे अपने निवास स्थान लौट आएँ। घर आके नहा कर शुद्ध हो जाए
*अंतिम स्थिति प्रयोग की*
यह प्रयोग केवल गंभीर परिस्थिति में, आत्मरक्षा की भावना से और धर्मसम्मत उद्देश्य से ही किया जाना चाहिए। सच्चा साधक जानता है कि सर्वोच्च शक्ति क्षमा, धैर्य और सद्कर्म में निहित है। तांत्रिक साधना का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, संतुलन और शांति की स्थापना है।
–विशेष ध्यान –
ये साधना प्रयोग बाहोत उग्र और घातक हैं, गुरु निगरानी में करे, करने से पहले गहराई से सोचले अन्यथा खुद के हानि के जिम्मेदार खुद होंगे |
गुरुजी –91 9207283275
महाकाल की कृपा आप सभी साधकों पर बनी रहे।
हर हर महादेव।




