पितृ शांति की साधना और सरल उपाय पितृ अमावस्या पर क्या करें जिससे पितर प्रसन्न हों

 


पितृ अमावस्या पर क्या करें जिससे पितर प्रसन्न हों

 पितृ शांति की साधना और सरल उपाय


पितृ अमावस्या पर क्या करें जिससे पितर प्रसन्न हो

पितृ पक्ष में आने वाली अमावस्या का दिन उन परिवारों के लिए खास माना जाता है जो अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और स्मरण करते हैं। कई बार किसी कारण से परिवार के किसी दिवंगत सदस्य की श्राद्ध तिथि ठीक से पता नहीं होती या किसी वर्ष श्राद्ध का कर्म नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में पितृ अमावस्या के दिन पूरे परिवार के पितरों का स्मरण करके तर्पण और दान करने की परंपरा है।

पितरों को प्रसन्न करने के लिए बहुत कठिन साधना की आवश्यकता नहीं होती। श्रद्धा से किया गया तर्पण, पितरों के नाम से भोजन और दान तथा उनका मन से स्मरण करना ही इस दिन का मुख्य कर्म है।

पितृ अमावस्या के दिन सुबह क्या करें

सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा के स्थान को साफ करके एक दीपक जलाएं। इसके बाद अपने पितरों का स्मरण करें।
यदि परिवार में जिन पूर्वजों का देहांत हो चुका है, उनके नाम आपको मालूम हैं तो मन में उनके नाम लें। जिनके नाम याद नहीं हैं, उनके लिए भी अपने कुल के सभी दिवंगत पितरों का स्मरण किया जा सकता है।
इसके बाद तर्पण की तैयारी करें।
एक स्वच्छ पात्र में जल लें और उसमें थोड़े काले तिल डालें। यदि आपकी पारिवारिक परंपरा में कुश का प्रयोग होता है तो उसका भी प्रयोग करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करें।
तर्पण करते समय मन में यही भावना रखें कि यह जल आपके पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता के रूप में अर्पित किया जा रहा है।

पितृ अमावस्या का सरल पितृ मंत्र

तर्पण के समय इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है 

ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

इस मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक 11, 21 या 108 बार किया जा सकता है। जिन लोगों को अपने गुरु से कोई विशेष मंत्र मिला हुआ है, वे पितृ कर्म के समय अपने गुरु-मंत्र का ही जाप करें।

मंत्र का जाप करते समय जल्दबाजी न करें। कुछ देर शांत होकर पितरों का स्मरण करना अधिक उचित है।

पितरों की शांति के लिए एक सरल साधना

पितृ अमावस्या के दिन शाम के समय भी पितरों का स्मरण करके दीपक जलाया जा सकता है। घर में जहां पूजा का स्थान हो, वहां तिल के तेल या घी का दीपक अपनी परंपरा के अनुसार जलाएं।

इसके बाद आंखें बंद करके अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और उन सभी पूर्वजों को याद करें जिनके कारण आज परिवार का अस्तित्व है।

( फिर वो १०८ बार )

ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

का जाप करें।

जाप पूरा होने के बाद मन में अपने पितरों के लिए प्रार्थना करें कि परिवार पर उनकी कृपा बनी रहे और यदि पूर्वजों के प्रति कोई कर्तव्य अधूरा रह गया हो तो उसे पूरा करने की शक्ति मिले।

पितृ अमावस्या का एक पारंपरिक उपाय

पितृ अमावस्या के दिन पितरों के नाम से भोजन बनाकर पहले उन्हें मन से अर्पित करने की परंपरा कई परिवारों में रही है।

भोजन तैयार करने के बाद उसमें से थोड़ा हिस्सा अलग निकालकर गाय, कौए या जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार दिया जा सकता है।

विशेष रूप से कौए को भोजन देना पितृ कर्म से जुड़ी पुरानी लोक-परंपरा है। इसे किसी चमत्कार की गारंटी समझने के बजाय पितरों के स्मरण और अन्नदान की भावना से करना चाहिए।

यदि आपके घर में पहले से श्राद्ध की कोई निश्चित विधि चली आ रही है तो उसी को प्राथमिकता दें।

पितरों के नाम से अन्नदान करें

पितृ अमावस्या के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अन्न देना अच्छा माना जाता है।

बहुत अधिक खर्च करने की जरूरत नहीं है। एक व्यक्ति को भोजन कराना, आटा, चावल, दाल या अपनी क्षमता के अनुसार आवश्यक वस्तु देना भी किया जा सकता है।

दान करते समय किसी प्रकार का दिखावा न करें। मन में अपने पितरों का स्मरण करके दान करें।

यदि परिवार में किसी बुजुर्ग व्यक्ति की जरूरत पूरी की जा सकती है तो उनका ध्यान रखना भी इसी भावना का हिस्सा है।

पितृ दोष और पितृ अमावस्या

आजकल परिवार में कोई परेशानी आते ही उसे पितृ दोष से जोड़ दिया जाता है। ऐसा करना उचित नहीं है।

पितृ दोष एक ज्योतिषीय विषय है और उसकी जांच कुंडली तथा संबंधित परिस्थितियों के आधार पर ही की जानी चाहिए। केवल किसी व्यक्ति के कहने पर यह मान लेना कि घर में होने वाली हर समस्या पितृ दोष के कारण है, सही नहीं है।

यदि कुंडली में पितृ दोष बताया गया है तो किसी योग्य ज्योतिषी से उसकी पुष्टि करवाने के बाद ही कोई विशेष उपाय करें।

पितृ अमावस्या पर सामान्य तर्पण, श्राद्ध, दान और पितृ स्मरण कोई कठिन या डर पैदा करने वाला काम नहीं है।

एक और छोटा उपाय

पितृ अमावस्या के दिन घर के बुजुर्गों से अपने पुराने पूर्वजों के बारे में बात करें। उनका नाम, गांव, परिवार और उनके जीवन से जुड़ी बातें अगली पीढ़ी को बताएं।

कई परिवारों में पूर्वजों की तस्वीरें और उनके नाम धीरे-धीरे भूल जाते हैं। उनके बारे में बच्चों को बताना भी परिवार की परंपरा को आगे ले जाने का एक अच्छा तरीका है।

यदि किसी दिवंगत व्यक्ति के नाम से कोई अधूरा अच्छा काम पूरा किया जा सकता है तो इस दिन उसे पूरा करने का संकल्प भी लिया जा सकता है।

क्या नहीं करना चाहिए

पितृ अमावस्या के नाम पर डर पैदा करने वाले तांत्रिक प्रयोगों से बचना चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर श्मशान साधना, प्रेत साधना या उग्र तांत्रिक प्रयोग शुरू करना उचित नहीं है।

ऐसी साधनाएं अपनी परंपरा और योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना नहीं करनी चाहिए।

इसी तरह किसी को यह कहकर डराना कि अमुक उपाय नहीं किया तो पितर नाराज हो जाएंगे, उचित नहीं है। पितृ कर्म श्रद्धा से किया जाता है, भय से नहीं।

अंत में

पितृ अमावस्या अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति अपना कर्तव्य निभाने का दिन है। सुबह स्नान करके पितरों का स्मरण करें, अपनी परंपरा के अनुसार तर्पण करें, काले तिल और जल अर्पित करें तथा “ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः” मंत्र का जाप करें।

अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन और अन्नदान करें। कौए, गाय आदि को भोजन देने की पारंपरिक प्रथा हो तो उसे भी श्रद्धा से निभाया जा सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि इस दिन मन में अपने पूर्वजों के लिए सम्मान रहे। पितरों के नाम से किया गया अच्छा कार्य, जरूरतमंद को दिया गया भोजन और परिवार के बुजुर्गों की सेवा—इन सबका भाव एक ही है, अपने से पहले की पीढ़ियों को याद रखना और उनके प्रति कृतज्ञ रहना।

पितृ अमावस्या पर कोई कठिन प्रयोग करने की जरूरत नहीं। श्रद्धा से किया गया तर्पण, स्मरण, मंत्र-जप और दान ही गृहस्थ के लिए सरल मार्ग है।

पितृ शांति और पितृ दोष से राहत के सरल उपाय

पितरों की शांति के लिए बहुत कठिन अनुष्ठान करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए कुछ छोटे उपाय भी किए जा सकते हैं। इन उपायों का उद्देश्य पितरों का स्मरण, सेवा और उनके प्रति सम्मान प्रकट करना है।

१. प्रतिदिन पितरों को जल अर्पित करें

सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र में स्वच्छ जल लें। उसमें थोड़े काले तिल और संभव हो तो थोड़ा गंगाजल मिलाएं। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पितरों का स्मरण करें और श्रद्धापूर्वक जल अर्पित करें। जल अर्पित करते समय मन में अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और शांति की भावना रखें।

२. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं

पीपल को पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों में महत्वपूर्ण माना गया है। शनिवार या अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और शाम के समय उसके नीचे तिल या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद कुछ देर शांत बैठकर पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें।

३. घर की दक्षिण दिशा में दीपक रखें

दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना जाता है। शाम के समय घर की दक्षिण दिशा में तिल के तेल का छोटा दीपक जलाकर पितरों का स्मरण किया जा सकता है। दीपक जलाते समय घर-परिवार की सुख-शांति और पूर्वजों की सद्गति की प्रार्थना करें।

४. पंचबली के रूप में भोजन निकालें

भोजन बनाते समय जीव-जंतुओं के लिए थोड़ा अन्न अलग निकालने की परंपरा रही है। गाय के लिए रोटी, कुत्ते के लिए भोजन तथा कौवे, चींटियों और पक्षियों के लिए अपनी क्षमता के अनुसार अन्न रखा जा सकता है। इसे नियमित रूप से करने से सेवा और दान की भावना बनी रहती है।

४. शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें

सोमवार या अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय थोड़े काले तिल चढ़ा सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव का स्मरण करते हुए पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें। यदि संभव हो तो कुछ समय शिव मंत्र का जाप भी करें।

६. अमावस्या पर अन्न का दान करें

अमावस्या का दिन पितरों के स्मरण और दान के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार आवश्यक सामग्री का दान करें। दान करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और सेवा की भावना रखें।

७. कौवों और पक्षियों को अन्न दें

पितृ पक्ष या अमावस्या के दिनों में कौवों को भोजन कराने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। सुबह या दोपहर में सादा भोजन अलग निकालकर कौवों तथा अन्य पक्षियों के लिए रखें। इसे पितरों के स्मरण के साथ किया जा सकता है।

८. अमावस्या के दिन घर में शांतिपूर्वक पितृ स्मरण करें

यदि किसी कारण से बाहर जाकर पूजा या दान करना संभव न हो तो अमावस्या के दिन घर में ही पितरों का स्मरण किया जा सकता है। स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाकर अपने पूर्वजों के नाम याद करें और उनके लिए शांति तथा सद्गति की प्रार्थना करें। परिवार के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान और सेवा करना भी पितृ-सम्मान की भावना से जुड़ा सरल कार्य है।

ध्यान रखें: इन उपायों को श्रद्धा और अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही करें। पितृ दोष जैसी ज्योतिषीय स्थिति का निश्चित समाधान व्यक्ति की कुंडली और परंपरा के अनुसार अलग-अलग बताया जाता है, इसलिए किसी बड़े अनुष्ठान का निर्णय बिना उचित मार्गदर्शन के न लें।

गुरूजी -+ 91 9207283275