दीपावली की रात्रि धन-प्राप्ति शाबर मंत्र साधना |
व्यापार वृद्धि और घर में लक्ष्मी की बरकत के लिए विशेष प्रयोग|
भारतीय तंत्र-मंत्र और शाबर साधना परंपरा में दीपावली की रात्रि को विशेष साधना काल माना गया है। इस रात्रि में गृहस्थ और साधक अपनी गुरु-परंपरा के अनुसार धन-समृद्धि, व्यापार में उन्नति, आर्थिक बाधाओं के निवारण तथा घर में लक्ष्मी की बरकत के लिए विभिन्न मंत्रों का अनुष्ठान करते हैं। विशेषकर शाबर मंत्रों में गुरु-आदेश और संकल्प का अपना अलग महत्व है।
शाबर मंत्रों की विशेषता यह है कि इनकी भाषा सरल और लोक परंपरा से जुड़ी होती है। इनमें गुरु गोरखनाथ जी का स्मरण तथा गुरु-परंपरा की दुहाई देखने को मिलती है। प्रस्तुत मंत्र भी लक्ष्मी-नारायण के स्मरण और गुरु गोरखनाथ जी की दुहाई के साथ किया जाने वाला धन-प्राप्ति का एक शाबर मंत्र है। दीपावली की रात्रि में इस मंत्र का जाप व्यापार की उन्नति, धन की आवक और गृहस्थ जीवन में आर्थिक स्थिरता के संकल्प से किया जा सकता है।
तीव्र धन-प्रदायक शाबर मंत्र-
मंत्र:
ॐ नमो आदेश गुरु को। सुवर्ण की काया, रूप की माया, जहाँ बैठे लक्ष्मी-नारायण, वहाँ मेरी काया। चल-चल रे लक्ष्मी, ठहर-ठहर, जो कोई रोके तो विघ्न हरे। दुहाई गुरु गोरखनाथ की, मंत्र साचा, पिंड कांचा, फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा॥
दीपावली की रात्रि में मंत्र साधना का समय
इस साधना के लिए दीपावली की रात्रि का समय निर्धारित किया गया है। साधक लक्ष्मी-गणेश पूजन संपन्न करने के पश्चात रात्रि में किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर बैठकर मंत्र जाप कर सकते हैं। साधना के समय घर में अनावश्यक शोर-शराबा न हो तथा साधक का मन एकाग्र रहे, इसका ध्यान रखें।
यदि कोई व्यक्ति व्यापार करता है तो वह अपनी दुकान अथवा प्रतिष्ठान में भी इस साधना को संपन्न कर सकता है। गृहस्थ व्यक्ति अपने घर के पूजन स्थान पर बैठकर भी मंत्र जाप कर सकते हैं।
धन-प्राप्ति शाबर मंत्र की संपूर्ण विधि
१. स्थान और आसन की व्यवस्था: दीपावली की रात्रि में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। साधना के लिए लाल अथवा पीले रंग का आसन बिछाएं। आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
२. पूजन की तैयारी: अपने सामने एक छोटी चौकी स्थापित करें। चौकी पर स्वच्छ लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान लक्ष्मी-नारायण का चित्र अथवा प्रतिमा स्थापित करें। साथ में गुरु गोरखनाथ जी का स्मरण करें। यदि गुरु का चित्र उपलब्ध हो तो उसे भी स्थापित कर सकते हैं।
३. दीप एवं नैवेद्य: भगवान के सामने शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें। धूप, पुष्प, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद लक्ष्मी-नारायण का ध्यान करके श्रद्धापूर्वक पूजन करें।
४. संकल्प: अब दोनों हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना का संकल्प लें। संकल्प में व्यापार की वृद्धि, आर्थिक बाधाओं का निवारण, धन की उचित आवक और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना करें। किसी दूसरे व्यक्ति का अहित करने अथवा अनुचित तरीके से धन प्राप्त करने का भाव न रखें।
५. मंत्र जाप: संकल्प के पश्चात गुरु गोरखनाथ जी का स्मरण करें और ऊपर दिए गए संपूर्ण शाबर मंत्र का १०८ बार जाप करें। जाप करते समय मंत्र के प्रत्येक शब्द का स्पष्ट उच्चारण करें। जल्दबाजी में जाप पूरा करने के बजाय एकाग्रता और श्रद्धा बनाए रखें।
६. साधना की पूर्णता: मंत्र जाप पूरा होने के पश्चात भगवान लक्ष्मी-नारायण और गुरु गोरखनाथ जी को प्रणाम करें। अपनी मनोकामना निवेदन करें और साधना में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
व्यापार में वृद्धि और दुकान की बरकत के लिए प्रयोग
जो व्यक्ति व्यापार अथवा व्यवसाय से जुड़े हैं, वे दीपावली की रात्रि में अपने व्यापार स्थल पर भी इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके लिए दुकान अथवा प्रतिष्ठान को पहले स्वच्छ करें। पूजन स्थान पर भगवान लक्ष्मी-नारायण का चित्र स्थापित करके दीपक प्रज्वलित करें।
इसके पश्चात व्यापार की बही-खाता, तिजोरी अथवा गल्ले को सामने रखकर गुरु गोरखनाथ जी का स्मरण करें और निर्धारित मंत्र का जाप करें। जाप के समय अपने व्यापार की उन्नति, ग्राहकों की वृद्धि, रुके हुए कार्यों में गति तथा आर्थिक परेशानियों के निवारण का संकल्प लें।
व्यापार में बरकत बनाए रखने के लिए व्यवहार में ईमानदारी और लेन-देन में पारदर्शिता भी आवश्यक है। साधना के साथ पुरुषार्थ और उचित कर्म का अपना महत्व है।
शाबर मंत्र साधना में गुरु का महत्व
शाबर मंत्र परंपरा में गुरु का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंत्र में आने वाला 'ॐ नमो आदेश गुरु को' गुरु-परंपरा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव प्रकट करता है। इसी प्रकार मंत्र के अंतिम भाग में गुरु गोरखनाथ जी की दुहाई दी गई है।
शाबर मंत्रों के अलग-अलग पाठ और प्रयोग विभिन्न गुरु-परंपराओं में प्रचलित हो सकते हैं। इसलिए किसी मंत्र को सिद्ध करने अथवा विशेष अनुष्ठान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता और प्रयोग-विधि गुरु से समझना उचित है। साधक को अपनी इच्छा से मंत्र के शब्दों में परिवर्तन नहीं करना चाहिए। ये नाथ पंथी मंत्र हैं इनका कोई अर्थ नहीं होता है परंतु तीव्र गति से कार्य करते हैं, बस साधक गुरु प्रणीत हो तो शीघ्र अनुभूति संभव हैं,
दीपावली की रात्रि में की जाने वाली यह साधना धन-समृद्धि, व्यापार की उन्नति और घर की आर्थिक खुशहाली के संकल्प से की जाती है। इसे निश्चित धन-प्राप्ति की गारंटी न मानें, बल्कि श्रद्धा, गुरु-स्मरण और सद्कर्म के साथ की जाने वाली साधना के रूप में ग्रहण करें।
गुरु गोरखनाथ जी की कृपा से सभी साधकों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे, व्यापार में उन्नति हो और मां लक्ष्मी की कृपा सभी पर बनी रहे।
॥ आदेश आदेश ॥
गुरूजी -91 9207283275
