दीपावली की रात महालक्ष्मी साधना: प्राचीन टोटके| निशीथ काल के नियम और तांत्रिक शाबर मंत्र|

 


दीपावली की रात महालक्ष्मी साधना: प्राचीन टोटके,|
निशीथ काल के नियम और तांत्रिक शाबर मंत्र|

दीपावली का पर्व केवल दीपों और रोशनी का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त करने की सबसे बड़ी रात्रि है। तंत्र और ज्योतिष शास्त्र में दीपावली की रात को 'निशीथ काल' (सिद्धि की रात्रि) कहा गया है। इस रात ब्रह्मांड की ऊर्जाएँ विशेष रूप से सक्रिय होती हैं, जिसके कारण प्राचीन उपायों और मंत्रों का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।


यदि आप भी अपने जीवन से दरिद्रता को दूर कर घर में स्थायी बरकत लाना चाहते हैं, तो यहाँ दीपावली की रात किए जाने वाले प्रामाणिक प्राचीन टोटके, मुख्य विधान और तांत्रिक शाबर मंत्रों की पूरी विधि दी गई है। जो कि साधकों के लिए उपहार है ! जय महाकाल साधक मित्रों आज दीपावली के अवसर पे एक नई साधना प्रस्तुत कर रहे हैं


१. दीपावली की रात्रि के अचूक प्राचीन टोटके:


प्राचीन परंपराओं में कुछ ऐसे विशेष उपाय बताए गए हैं जो माता लक्ष्मी को प्रसन्न कर घर में स्थिरता लाते हैं:
कौड़ी और गोमती चक्र का प्रयोग: दीपावली की रात लक्ष्मी पूजन के दौरान ११ पीली कौड़ियाँ और

 ३ गोमती चक्र माँ लक्ष्मी के चरणों में रखें। इन पर कुमकुम, हल्दी और चावल अर्पित करें। अगले दिन इन्हें एक लाल रेशमी कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख लें। इससे धन का आगमन निरंतर बना रहता है।


चार मुखी दीपक का विधान: दीपावली की रात घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ शुद्ध घी के दीपक जलाएँ। इसके अलावा, एक चौमुखी (चार मुख वाला) दीपक सरसों के तेल का भरकर रात भर के लिए घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में प्रज्वलित छोड़ दें। यह नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है।


कमल गट्टे की माला से अनुष्ठान: दीपावली की रात एकांत कमरे में लाल आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। स्फटिक या कमल गट्टे की माला से महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। यह प्रयोग व्यापार और नौकरी में आ रही बाधाओं को दूर करता है।

२. दीपावली की रात क्या करें? (मुख्य विधान):


दीपावली की रात की गई पूजा का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए:

निशीथ काल पूजा (मध्यरात्रि): रात ११:३० बजे से १:३० बजे के बीच का समय लक्ष्मी साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस दौरान स्थिरता और एकाग्रता के साथ माँ लक्ष्मी और गणेश जी की षोडशोपचार पूजा करें।

अखंड दीप प्रज्वलन: माता के समक्ष घी का एक ऐसा दीपक जलाएं जो पूरी रात अखंड रूप से जलता रहे।
श्रीसूक्त और कनकधारा पाठ: पूजन संपन्न होने के बाद 'श्रीसूक्त' और 'कनकधारा स्तोत्र' का पाठ अवश्य करें।

घर की ऊर्जा शुद्धि: दीपावली की संध्या पर घर के हर कोने में गंगाजल का छिड़काव करें। शंख और घंटी की ध्वनि करें ताकि नकारात्मक ऊर्जा बाहर जा सके और सात्विक ऊर्जा का प्रवेश हो।


३. महालक्ष्मी का शक्तिशाली तांत्रिक शाबर मंत्र- 


शाबर मंत्र वे सिद्ध और तीव्र मंत्र हैं जिन्हें नाथ पंथ के योगियों द्वारा लोक-भाषा में रचा गया है। इनमें जटिल संस्कृत व्याकरण की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि अटूट विश्वास और सही उच्चारण से ये तुरंत प्रभाव दिखाते हैं।


मंत्र:- 
"ॐ गुरु जी। काली-काली महाकाली, कपाल वाली, खान-पान की रखवाली।
लक्ष्मी आवे, घर में समावे, दुविधा भागे, दरिद्रता भागे, जो न भागे तो गुरु गोरखनाथ की दुहाई, फिरै सदा भाई।"

जप विधि एवं नियम:- 

शुभ मुहूर्त: दीपावली की रात ठीक मध्यरात्रि (निशीथ काल) में इस मंत्र का जाप करना सबसे उत्तम होता है।
आसन और दिशा: स्नान के बाद लाल या पीले वस्त्र धारण करें। उत्तर दिशा की ओर मुख करके लाल ऊनी आसन पर बैठें।


स्थापना: लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर महालक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। सामने सुगंधित धूप और अखंड दीप प्रज्वलित करें।


माला का चयन: इस मंत्र के जाप के लिए स्फटिक माला या कमलगट्टे की माला का प्रयोग करें।
मंत्र संख्या: दीपावली की रात इस शाबर मंत्र की कम से कम ५ माला (लगभग ५०० बार) का स्पष्ट उच्चारण के साथ जाप करें। जाप के पश्चात शांत चित्त होकर सो जाएँ और इस प्रयोग को गोपनीय रखें।


दीपावली पर की जाने वाली साधना और उपाय तभी फलीभूत होते हैं जब मन में पूर्ण श्रद्धा, आचार-विचार की पवित्रता और अनुशासन हो। यदि इन नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए, तो माता लक्ष्मी की कृपा से घर के सभी आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। दीवाली की रात बहोत ऊर्जात्मक होती है कई बार साधना में झटके लग जाते हैं , तो सावधानी बरते गुरु निर्देश के अंतर्गत साधना करे , सुरक्षित और सफल रहेंगे!


गुरूजी - 91 9207 283 275