नवनाथों की कृपा-साधना साम्प्रदायिक पूजा-विधान


-जय महाकाल -

–:नव-नाथ साम्प्रदायिक पूजा-विधान:–

नवनाथों की कृपा-साधना : आध्यात्मिक सिद्धि और संरक्षण का दिव्य मार्ग






   नवनाथों की कृपा-साधना : आध्यात्मिक सिद्धि और संरक्षण का दिव्य मार्ग–


भारतीय साधना परम्परा में नवनाथ संप्रदाय एक अत्यन्त प्राचीन और सिद्ध परंपरा मानी जाती है। यह परंपरा योग, तंत्र और हठयोग साधना का मूल स्रोत है। नवनाथों को भगवान शिव का अंशावतार माना जाता है, जिन्होंने विभिन्न युगों में अवतरित होकर धर्म और साधना का प्रचार किया।

नाथ संप्रदाय के प्रमुख नौ सिद्ध योगी हैं —
चैतन्य मच्छिन्द्रनाथ–
चैतन्य गोरखनाथ–
चैतन्य जालंधरनाथ–
चैतन्य कानिफनाथ–
चैतन्य चर्पटनाथ–
चैतन्य नागनाथ–
चैतन्य भर्तृहरिनाथ–
चैतन्य रेवणनाथ–
चैतन्य गहिनीनाथ–

इन नौ नाथों की साधना से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, रोग-नाश, शत्रु-विनाश, व्यवसाय में उन्नति तथा आत्म-साक्षात्कार की प्राप्ति होती है।

🌺 नवनाथों की कृपा का महत्व–
नाथ योगियों की साधना मुख्यतः कुण्डलिनी जागरण, मन-नियंत्रण और आत्म-सिद्धि पर आधारित है। इनकी कृपा से –मानसिक भय और अशांति दूर होती है अभिचार, नकारात्मक शक्तियाँ और बाधाएँ नष्ट होती हैं
साधक के जीवन में स्थिरता और सफलता आती है आध्यात्मिक उन्नति तीव्र गति से होती है
विशेषकर गुरुवार, पूर्णिमा, और वरुथिनी एकादशी का दिन नाथ-साधना के लिए अत्यन्त शुभ माना गया है।

नवनाथ कृपा-साधना का सरल विधान प्रारंभिक तैयारी
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
स्वच्छ पीले या गेरुए वस्त्र धारण करें।
उत्तर दिशा की ओर आसन लगाएँ।
लकड़ी के पाट या ताम्र-पात्र पर नवनाथों का चित्र या प्रतीक स्थापित करें।

2️⃣ आवाहन मंत्र–
दीप प्रज्वलित करके निम्न मंत्र से आवाहन करें –
ॐ आदिनाथाय नमः।
ॐ नवनाथाय नमः।
फिर प्रत्येक नाथ का नाम लेकर 11 या 21 बार जप करें।

3️⃣ प्रमुख मंत्र–
🔹 गुरु मच्छिन्द्रनाथ मंत्र
ॐ चैतन्य मच्छिन्द्रनाथाय नमः॥

🔹 गुरु गोरक्षनाथ मंत्र
ॐ चैतन्य गोरक्षनाथाय नमः॥

🔹 सम्पूर्ण नवनाथ मंत्र
ॐ श्री नवनाथाय नमः॥

🔹 संरक्षण मंत्र–
ॐ ह्रीं नाथाय नमः॥

प्रत्येक मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने से शीघ्र फल मिलता है।

नवनाथ गायत्री मंत्र–
ॐ नाथाय विद्महे योगीश्वराय धीमहि तन्नो नाथः प्रचोदयात्॥

इस मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करने से साधक को दिव्य संरक्षण प्राप्त होता है।

🌼 विशेष साधना : व्यवसाय एवं धन लाभ हेतु–

यदि व्यापार में हानि हो रही हो या आर्थिक बाधाएँ हों, तो गुरुवार के दिन व्रत रखकर यह मंत्र जपें –
ॐ गोरक्षनाथाय नमः स्वाहा॥

पीले पुष्प और गुड़-चना अर्पित करें। 21 दिनों तक नियमित जप करने से लाभ आरम्भ हो जाता है।

🌕 पूर्णिमा साधना

पूर्णिमा की रात्रि में नवनाथों का ध्यान करें। धूप-दीप अर्पित करके यह प्रार्थना करें –
“हे नवनाथ! मेरे जीवन की समस्त बाधाएँ दूर कर मुझे धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करें।”
उस दिन गाय को आटा-चारा और कुत्ते को रोटी अवश्य दें। यह नाथों की कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय है।

🧘 नवनाथ ध्यान विधि–
शांत स्थान पर पद्मासन या सुखासन में बैठें।
आँखें बंद कर भ्रूमध्य में प्रकाश की कल्पना करें।
अनुभव करें कि नौ दिव्य योगी आपके चारों ओर संरक्षण चक्र बना रहे हैं।
“ॐ नवनाथाय नमः” का मानसिक जप करें।
यह साधना भय, दुःस्वप्न और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करती है।

🔔 साधना के नियम
ब्रह्मचर्य और सात्त्विक आहार रखें।
असत्य, क्रोध और निन्दा से दूर रहें।
गुरु-भक्ति और श्रद्धा अनिवार्य है।
प्रसाद घर के सदस्यों में ही बाँटें।
यदि साधक श्रद्धा और विश्वास से यह साधना करता है, तो उसे शीघ्र अनुभव होने लगते हैं।

🌟 नवनाथों की कृपा के लक्षण
मन में अद्भुत शांति
कार्यों में स्वतः सफलता
स्वप्न में मार्गदर्शन
भय और रोग से मुक्ति
आध्यात्मिक जागरण

🪔 निष्कर्ष
नवनाथ साधना केवल भौतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और मोक्ष का मार्ग है। यह साधना हमें सिखाती है कि सच्चा गुरु हमारे भीतर ही विराजमान है। नवनाथों की कृपा से साधक का जीवन सुरक्षित, संतुलित और सफल बनता है।


अन्य नाथ पंथी पूजन –

– नाथ परंपरा और उनकी सांप्रदायिक पूजन पद्धति


नाथ परम्परा में गुरु-तत्त्व को सर्वोपरि माना गया है। मच्छिन्द्रनाथ, गोरखनाथ और कानिफनाथ की उपासना से साधक को आध्यात्मिक संरक्षण, भय-नाश, कार्य-सिद्धि तथा गृह-शांति की प्राप्ति होती है। यह पूजन किसी भी गुरुवार या पूर्णिमा को किया जा सकता है; विशेषतः वरुथिनी एकादशी का दिन अत्यन्त शुभ माना गया है।


 1. पूजन से पूर्व की तैयारी
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर शौच-स्नान करें।
स्वच्छ, अधिमानतः पीले या गेरुए वस्त्र धारण करें।
पूजन स्थान उत्तर या पूर्वाभिमुख रखें।
ताम्र (ताँबे) का पात्र, दूध, शुद्ध जल, भस्म, गंध-अष्टगंध, इत्र, पुष्प, धूप, गूगल, शुद्ध घी का दीप, नैवेद्य (मूँग-दाल की खिचड़ी, उड़द के बड़े) आदि सामग्री तैयार रखें।

🌿 2. पवित्र डालियों का संग्रह
बरगद, उदुम्बर और पीपल वृक्ष की उत्तर दिशा से 8-9 इंच लंबी एक-एक डाली लें।
डालियाँ हाथ से ही तोड़ें, किसी शस्त्र का प्रयोग न करें।
घर लाकर उन्हें 6-8 इंच के टुकड़ों में कर लें।
ताम्र-पात्र में रखकर दूध और जल से स्नान कराएँ।
स्वच्छ नये वस्त्र से पोंछें।
अब वट-वृक्ष के तीन पत्तों पर तीनों डालियाँ अलग-अलग स्थापित करें और उन पर पवित्र भस्म अर्पित करें।

🔔 3. आवाहन (आमंत्रण) विधि
अब प्रत्येक डाली को दाहिने हाथ में लेकर निम्न मंत्र 21 बार जपें —
🔹 पहली डाली (मच्छिन्द्रनाथ)
ॐ चैतन्य मच्छिन्द्रनाथाय नमः॥
🔹 दूसरी डाली (गोरक्षनाथ)
ॐ चैतन्य गोरक्षनाथाय नमः॥
🔹 तीसरी डाली (कानिफनाथ)
ॐ चैतन्य कानिफनाथाय नमः॥
जप करते समय दृढ़ भाव रखें कि संबंधित नाथ उस डाली में निवास कर रहे हैं। यही प्रक्रिया आवाहन
 कहलाती है।

🌺 4. पूजन एवं अर्पण विधि
तीनों डालियों के समक्ष गंध, अष्टगंध, इत्र, पुष्प और दक्षिणा अर्पित करें।
प्रत्येक डाली पर दाहिना हाथ रखकर निम्न त्रि-प्रणव युक्त गायत्री मंत्र 11-11 बार जपें —
ॐ भूर्भुवः स्वः।ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ॥
धूप, गूगल, अगरबत्ती एवं शुद्ध घी का दीप भक्तिभाव से अर्पित करें।
नैवेद्य में मूँग-दाल की खिचड़ी, उड़द के बड़े आदि अर्पित करें।
प्रसाद केवल घर के सदस्यों में बाँटें; बाहरी व्यक्तियों को न दें।

 5. विसर्जन एवं संरक्षण
सांयकाल पूजा के पश्चात —
तीनों डालियों को गेरुए (भगवा) रेशमी वस्त्र में रखकर थैली बनाएँ।
थैली का मुख सिलाई से बंद कर दें।
इसे घर के किसी पवित्र स्थान पर स्थापित करें।
प्रतिदिन तीनों नाथों का 7 बार नाम-मंत्र जप करें और संकल्प लें —
“अब तीनों नाथ हमारे गृह में विराजमान हैं; हमारा सर्वमंगल उन्हीं की कृपा से होगा।”

🌕 6. नियमित साधना नियम
प्रत्येक गुरुवार व्रत रखें या एक समय भोजन करें।
धूप-दीप अर्पित करें।
पूर्णिमा को गो-ग्रास दें तथा कुत्ते को रोटी खिलाएँ।
बाहर जाते समय नाथों को प्रणाम कर प्रार्थना करें।

🌙 7. विशेष लाभ एवं मान्यता
थैली को सिरहाने रखकर सोने से दुःस्वप्न नहीं आते।
अभिचार या नकारात्मक प्रभाव से पीड़ित व्यक्ति को इससे झाड़ने से बाधाएँ दूर होती हैं।
व्यवसाय में हानि हो तो यह पूजन लाभकारी सिद्ध होता है।
गृह-शांति एवं सुरक्षा का स्थायी कवच बनता है।

🌼 8. विशेष निर्देश
यदि अपने कुलदेवता या इष्टदेव की कृपा चाहिए तो इसी विधान से पूजन करें, केवल नाथ-मंत्र के स्थान पर अपने इष्ट का मंत्र जपें।साधना में श्रद्धा, शुद्ध आचरण और गुरु-भक्ति अनिवार्य है।

– समापन प्रार्थना–

यह विधिपूर्वक किया गया पूजन साधक के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, साहस, सुरक्षा और समृद्धि का द्वार खोलता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक साधना करने से नाथों की कृपा शीघ्र अनुभव होती है।

श्री नाथजी को आदेश आदेश आदेश 
ॐ श्री नवनाथाय नमः॥


गुरुजी – 91 9207283275










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