बगलामुखी पंचमास्त्र साधना: शत्रु स्तंभन, मुकदमे में विजय और तांत्रिक बाधा निवारण की दुर्लभ सिद्धि



बगलामुखी पंचमास्त्र साधना: शत्रु स्तंभन, मुकदमे में विजय और तांत्रिक
 बाधा निवारण की दुर्लभ सिद्धि :- 


मित्रों को जय महाकाल 
तंत्र साधना के क्षेत्र में माँ बगलामुखी की उपासना को अत्यंत प्रभावशाली और शीघ्र फलदायी माना गया है। माँ बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है, जो शत्रु की वाणी, बुद्धि, अन्यायपूर्ण शक्ति और नकारात्मक प्रभाव को रोकने की सामर्थ्य रखती हैं। प्रस्तुत साधना को अनेक साधक "बगलामुखी अस्त्र साधना" तथा कुछ परंपराओं में "बृहदभानुमुखी पंचमास्त्र साधना" के नाम से जानते हैं।

यह साधना विशेष रूप से उन साधकों के लिए उपयोगी मानी जाती है जिन्हें शत्रु बाधा, न्यायालय संबंधी विवाद, तांत्रिक आक्रमण, ग्रहजनित कष्ट अथवा जीवन में निरंतर असफलताओं का सामना करना पड़ रहा हो। यदि किसी साधक को सामान्य बगलामुखी साधना में अपेक्षित सफलता न मिल रही हो, तो यह साधना उसी सिद्धि की प्राप्ति में अत्यंत सहायक मानी जाती है।

इस मंत्र का प्रत्येक बीजाक्षर अत्यंत शक्तिशाली माना गया है। नियमित एवं विधिपूर्वक जप करने पर साधक को शीघ्र ही साधना की अनुभूतियाँ प्राप्त होने लगती हैं। माँ बगलामुखी को "नक्षत्र स्तंभिनी" भी कहा जाता है, इसलिए श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनकी कृपा से ग्रहजनित बाधाओं का प्रभाव भी कम होने लगता है।

शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, इस साधना के प्रभाव से शत्रु पक्ष की अनुचित शक्ति क्षीण होती है, मुकदमों में अनुकूलता प्राप्त होती है, तंत्र-बाधाओं से रक्षा होती है तथा साधक के आत्मविश्वास और स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होती है। जीवन में बार-बार आने वाली बाधाएँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और कार्यों में सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।
साधना का शुभ समय

इस साधना को माँ बगलामुखी जयंती के दिन करना सर्वोत्तम माना गया है। ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान से पूर्व स्नान के जल में थोड़ी सी हल्दी मिला लें। हल्दी का प्रयोग माँ बगलामुखी की प्रिय वस्तु माना जाता है और यह साधना में विशेष महत्व रखता है।
आवश्यक सामग्री पीले रंग का आसन पीले वस्त्र गुरु चित्र माँ बगलामुखी का चित्र पीला वस्त्र
हल्दी से रंगे हुए चावल पाँच साबुत हल्दी की गाँठें घी का दीपक पूजन सामग्री

साधना विधि:- 
पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें। अपने सामने बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर गुरु चित्र एवं माँ बगलामुखी का चित्र स्थापित करें।हल्दी मिश्रित चावलों की पाँच ढेरियाँ बनाकर प्रत्येक ढेरी पर एक-एक साबुत हल्दी की गाँठ स्थापित करें। विधिवत पूजन करके घी का दीपक प्रज्वलित करें।

सबसे पहले अपने गुरु मंत्र की पाँच मालाएँ जपें। इसके पश्चात एक बार गुरु मंत्र का स्मरण करके बिना किसी माला के लगभग 90 मिनट तक नीचे दिए गए मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। मंत्र जप प्रारंभ करने से पहले अपने उद्देश्य का स्पष्ट संकल्प अवश्य लें। 

मंत्र:- 
ॐ ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् ह्लौम् ह्लः ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः बगलामुखी ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् ह्लौम् ह्लः ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः। जिव्हां कीलय कीलय। ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् ह्लौम् ह्लः ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः बुद्धिं नाशय नाशय।
ह्लाम् ह्लीम् ह्लुम् ह्लैम् ह्लौम् ह्लः ह्रां ह्रीं हूं ह्रौं ह्रः हूं फट् स्वाहा॥


रात्रिकालीन अनुष्ठान:- 
उसी दिन रात्रि 9 बजे के बाद इसी विधान को पुनः एक बार संपन्न करें। ऐसा करने से साधना की पूर्णता और सिद्धि का मार्ग प्रशस्त माना जाता है। साधना पूर्ण होने के बाद अगले दिन सम्पूर्ण साधना सामग्री को किसी स्वच्छ बहते जल में श्रद्धापूर्वक विसर्जित कर दें।साधना सिद्ध होने के पश्चात आवश्यकता अनुसार इस मंत्र का 21, 51 अथवा 108 बार जप करके अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करने का प्रयास किया जा सकता है।

विशेष मान्यता:- 
तांत्रिक परंपरा में यह भी माना जाता है कि यदि किसी विशेष लक्ष्मी साधना से पूर्व इस मंत्र का 21 बार जप किया जाए, तो आय में वृद्धि, अनावश्यक खर्चों में कमी तथा धन की स्थिरता प्राप्त होने में सहायता मिलती है। गृहस्थ जीवन में बरकत और आर्थिक संतुलन बनाए रखने हेतु भी अनेक साधक इस प्रयोग का उल्लेख करते हैं।

आवश्यक सावधानियाँ:- 
यह साधना अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। इसलिए इसे पूर्ण श्रद्धा, संयम और सात्त्विक भाव से ही करें। किसी निर्दोष व्यक्ति को हानि पहुँचाने, अन्यायपूर्ण उद्देश्य या दुरुपयोग के लिए किसी भी तांत्रिक साधना का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि संभव हो तो योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही साधना करें।

जय महाकाल। जय माँ बगलामुखी। जय गुरु गोरखनाथ।


गुरूजी :- 91 9207283275