जय महाकाल
– शीतला अष्टमी तांत्रिक पूजा विधि–माता शीतला मंत्र–
शीतला अष्टमी पूजा विधि – बसोड़ा क्यों मनाया जाता है, व्रत कथा और माता शीतला मंत्र तथा तांत्रिक महत्व
शीतला अष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण और पवित्र व्रत भी हैं और साधना भी है। यह पर्व माता शीतला को समर्पित होता है, जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी कहते है। मान्यता है कि माता शीतला की कृपा से चेचक, बुखार, त्वचा रोग और अन्य प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है। शीतला अष्टमी का व्रत विशेष रूप से होली के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण और साधक श्रद्धा और विश्वास के साथ माता शीतला की पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि तथा रोगमुक्ति की कामना करते हैं।
– शीतला अष्टमी का महत्व–
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शीतला शीतलता और स्वास्थ्य की देवी हैं। प्राचीन समय में जब चिकित्सा सुविधाएं कम थीं, तब लोग देवी शीतला की पूजा कर रोगों से रक्षा की प्रार्थना करते थे। आज भी कई स्थानों पर यह परंपरा बड़ी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता शीतला की पूजा करता है, उसके घर में रोग-दोष नहीं टिकते और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
बसोड़ा क्यों मनाया जाता है – शीतला अष्टमी के साथ “बसोड़ा” की परंपरा भी जुड़ी हुई है। बसोड़ा का अर्थ है “बासी भोजन”। इस दिन घरों में एक दिन पहले बना हुआ ठंडा भोजन माता शीतला को भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा और शीतल भोजन प्रिय है, इसलिए इस दिन चूल्हा नहीं जलाया जाता।
बसोड़ा के दिन लोग पूरी, पकौड़ी, मीठे चावल, हलवा, दही और अन्य पकवान एक दिन पहले ही बनाकर रख लेते हैं। अगले दिन वही भोजन माता शीतला को अर्पित किया जाता है और प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। यह परंपरा हमें संयम, श्रद्धा और प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देती है।
–शीतला अष्टमी पूजा विधि–
शीतला अष्टमी के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करके माता शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा में जल, अक्षत, रोली, फूल, धूप, दीप और बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है।
पूजा करते समय माता शीतला का ध्यान करते हुए प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार को रोगों और संकटों से बचाएं। इसके बाद शीतला माता की व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करके प्रसाद वितरण करें। इस दिन शांत मन से माता का स्मरण करना विशेष फलदायी माना जाता है।
*शीतला माता व्रत कथा*
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार एक नगर में शीतला अष्टमी का पर्व आया। नगर की अधिकांश महिलाओं ने माता शीतला का व्रत रखा और बसोड़ा का पालन किया, लेकिन एक स्त्री ने इस परंपरा को महत्व नहीं दिया और उस दिन भी घर में चूल्हा जला दिया। कुछ ही समय बाद उसके परिवार में रोग फैलने लगे।जब उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, तब उसने सच्चे मन से माता शीतला की पूजा की और व्रत का पालन किया। माता की कृपा से उसके परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ हो गए। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाना चाहिए और माता की श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए।
– शीतला माता का मंत्र –
– पूजा के समय माता शीतला का यह सरल मंत्र जपना शुभ माना जाता है—
ॐ ह्रिम श्रीं शीतलायै नमः।
इस मंत्र का श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करने से मन को शांति मिलती है और देवी की कृपा प्राप्त होती है। कुछ भक्त माता शीतला के बीज मंत्र और स्तोत्र का भी पाठ करते हैं।
– शीतला माता का तांत्रिक महत्व –
तांत्रिक परंपरा में भी माता शीतला का विशेष महत्व माना गया है। कुछ साधक माता को रोग-निवारण और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाली शक्ति के रूप में पूजते हैं। तांत्रिक साधना में देवी का ध्यान कर विशेष मंत्रों का जप किया जाता है, जिससे साधक मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास प्राप्त करता है।
*वैसे माता शीतला के तांत्रिक मंत्र अति तीव्र होते हैं उन्हें गुप्त रखा गया हैं उन्हें गुरु परंपरा से ग्रहण करना चाहिए*
हालाँकि ऐसी साधनाएं गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए। सामान्य भक्तों के लिए माता शीतला की भक्ति, पूजा और मंत्र जप ही सबसे सरल और सुरक्षित मार्ग माना जाता है।
– फलश्रुति –
शीतला अष्टमी केवल एक धार्मिक विधि पर्व ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य, स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष आध्यात्मिक कर्म भी है। यह पर्व हमें सिखाता है कि देवी-देवताओं की पूजा के साथ-साथ हमें अपने जीवन में अनुशासन और विश्वास बनाए रखना चाहिए। सच्चे मन से माता शीतला की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और रोग-दोष क्लेश दूर होते हैं।
माता शीतला सभी भक्तों पर साधकों पर अपनी कृपा बनाए रखें और सभी को स्वस्थ एवं सुखी जीवन का आशीर्वाद दें।यही कामना करते हैं¡
||जय महाकाल||
गुरुजी : - 91 9207283275